सड़क पर लहूलुहान पड़ा था युवक… पत्रकार ने नहीं बनाई तस्वीर, कंधे पर उठाकर पहुंचाया अस्पताल
हाथरस/सिकंदराराऊ।
रात का सन्नाटा था… सड़क सुनसान थी… और एक युवक लहूलुहान हालत में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। उस वक्त वहां मौजूद एक पत्रकार के हाथ में कैमरा था, लेकिन उसने कैमरे का लेंस नहीं खोला—बल्कि इंसानियत का एक ऐसा अध्याय खोल दिया, जिसे शायद किसी खबर की जरूरत ही नहीं थी। सोमवार रात करीब 10 बजे सिकंदराराऊ-अलीगढ़ रोड पर KGN कॉलेज के पास करीमनगर निवासी सोहेल बाइक से अलीगढ़ की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक सड़क पर आई गाय से उनकी बाइक टकरा गई। हादसे में सोहेल सड़क पर जा गिरे। सिर और चेहरे पर गंभीर चोट लगने से खून तेजी से बहने लगा।
रात का वक्त था। सड़क पर आवाजाही भी कम थी। मदद की उम्मीद में घायल युवक सड़क पर पड़ा था। जेब में प्रेस कार्ड था, हाथ में कैमरा… मगर उस वक्त पत्रकार नहीं, इंसान जागा इसी दौरान वहां से पत्रकार मोहित कुमार (मोनू) गुजर रहे थे। हादसा देखकर वह रुके।
एक पत्रकार के लिए यह एक बड़ी खबर हो सकती थी—कैमरा निकाला जा सकता था, तस्वीरें ली जा सकती थीं, वीडियो बनाया जा सकता था और अगले दिन एक बड़ी सुर्खी तैयार हो सकती थी। लेकिन मोहित ने ऐसा कुछ नहीं किया। उन्होंने कैमरा बंद किया और घायल युवक को उठाने के लिए आगे बढ़े। एम्बुलेंस के इंतजार में समय गंवाना उन्हें उचित नहीं लगा। सोहेल की हालत लगातार बिगड़ रही थी। मोहित ने बिना अपनी साफ कमीज और कपड़ों की परवाह किए, खून से लथपथ घायल को अपने कंधे पर उठाया और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाने के लिए निकल पड़े।
कपड़ों पर खून के दाग लगे, लेकिन चेहरे पर इंसानियत की चमक थी
अस्पताल पहुंचने के बाद सोहेल को समय पर उपचार मिला। तब कहीं जाकर मोहित ने राहत की सांस ली। उनकी कमीज खून से सनी थी। कपड़ों पर लगे दाग उस रात की कहानी बयां कर रहे थे। लेकिन उन दागों से कहीं ज्यादा साफ वह भावना थी, जिसके चलते उन्होंने एक अनजान इंसान की मदद के लिए खुद को जोखिम में डाला।
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसे की खबर नहीं है। यह उस पत्रकारिता की तस्वीर है, जिसमें कैमरे के पीछे खड़ा इंसान भी दिखाई देता है।
सुर्खियां एक दिन की होती हैं, इंसानियत की मिसाल लंबे समय तक रहती है पत्रकारिता को अक्सर खबर, कैमरा और सुर्खियों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन मोहित कुमार ने उस रात यह संदेश दिया कि पत्रकार की जिम्मेदारी खबर लिखने तक सीमित नहीं है। जब सामने किसी की जिंदगी दांव पर हो, तो मानवीय संवेदना सबसे बड़ी खबर बन जाती है।
सिकंदराराऊ क्षेत्र में मोहित के इस साहस और संवेदनशीलता की चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ एक घायल को अस्पताल नहीं पहुंचाया, बल्कि समाज के सामने इंसानियत का एक ऐसा उदाहरण रखा है, जिसे याद रखा जाना चाहिए। क्योंकि खबरें अगले दिन पुरानी हो जाती हैं…
लेकिन किसी की जिंदगी बचाने के लिए बढ़ाया गया हाथ कभी पुराना नहीं होता।उस रात कैमरे का लेंस बंद था, लेकिन इंसानियत की तस्वीर हमेशा के लिए बन गई।











