आरओ लगाने के लिए धरोहर को हटाने पर उठे सवाल, नागरिकों ने संरक्षण की मांग की
सिकन्दराराऊ। पुरानी तहसील रोड पर वर्षों पुराने सार्वजनिक कुएं को तोड़े जाने के बाद स्थानीय लोगों में रोष है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में आरओ लगाए जाने के तहत कुएं को जेसीबी मशीन से तोड़ दिया गया। कुआं टूटने के बाद मौके पर मलबा बिखरा पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कुआं केवल एक पुराना जलस्रोत नहीं था, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा हुआ था।
कुआं पूजन की परंपरा से जुड़ा था स्थल
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस कुएं पर वर्षों से कुआं पूजन की परंपरा चली आ रही थी। शादी-विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर परिवार यहां पूजा-अर्चना करते थे। ऐसे में कुएं को तोड़े जाने से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। नागरिकों का कहना है कि किसी पुराने सार्वजनिक स्थल को हटाने से पहले उसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विचार किया जाना चाहिए था।
आरओ के लिए दूसरा स्थान क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में आरओ लगाने की आवश्यकता है, लेकिन इसके लिए प्राचीन कुएं को तोड़ना ही क्यों जरूरी था, यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि आरओ के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशकर कुएं को संरक्षित किया जा सकता था। यदि कुआं सुरक्षा की दृष्टि से अनुपयोगी था तो उसके चारों ओर सुरक्षा जाली लगाकर तथा परिसर का जीर्णोद्धार कर उसे सुरक्षित रखा जा सकता था।
मलबा कार्रवाई की स्थिति को बयां कर रहा
मौके पर कुएं के टूटे हुए हिस्से और बिखरा मलबा इस कार्रवाई की स्थिति को बयां कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल विरोध दर्ज कराने से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि किसके निर्देश पर कुआं तोड़ा गया और क्या इसे तोड़ने से पहले कोई वैकल्पिक व्यवस्था या संरक्षण योजना तैयार की गई थी?
प्रशासन से जवाबदेही का सवाल
क्या आरओ लगाने के लिए वर्षों पुरानी सार्वजनिक धरोहर को तोड़ना ही एकमात्र विकल्प था? कुएं को तोड़ने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और क्या स्थानीय लोगों की भावनाओं तथा इस स्थल से जुड़ी परंपराओं को ध्यान में रखा गया? अब प्रशासन को इन सवालों का जवाब देने के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि जिस स्थान पर कुआं था, वहां प्रस्तावित आरओ योजना का क्या स्वरूप है और इस कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है।









