सोमवार, मई 27, 2024
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कर्नाटक में किसकी सरकार बनेगी, अंदाजा लगाना मुश्किल

 

कर्नाटक में किसकी सरकार बनेगी इसका अंदाजा लगाना हर बार मुश्किल होता है। इस बार एग्जिट पोल के नतीजे दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होगी। लेकिन कई बार ये एग्जिट पोल झूठे साबित होते देखे गए है जैसे बिहार और बंगाल
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आगमी लोकसभा चुनाव 2024 का सेमीफाइनल के रुप में देखा जा रहा है। साथ ही आने वाले समय में राजस्थन, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आगामी चुनाव होने हैं।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर दक्षिण भारत की राजनीति की प्रस्तावना के तौर पर भी देखे जा रहे हैं। लेकिन सरकार आखिर में किसकी बनेगी इस पर अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है।

एबीपी न्यूज-सी वोटर के सर्वे के मुताबिक कांग्रेस को इस चुनाव में 110 से 112 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं जबकि बीजेपी को 73 से 85 सीटें मिल सकती है. वहीं क्षेत्रीय पार्टी जेडीएस को 21 से 29 सीटें मिल सकती है। इंडिया टुडे-सी वोटर के सर्वे के मुताबिक भी बीजेपी को 74-86 सीटें मिल सकती हैं।

कोई भी अंदाजा लगाने से पहले अब नजर डाल लेते हैं पांच साल पहले 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद आए सर्वे के नतीजों पर. टाइम्स नाऊ और वोटर्स मूड रिसर्च के ओपिनियन पोल में बीजेपी को बहुमत मिलते दिखाया गया था लेकिन पार्टी को कांग्रेस से थोड़ा ही ज्यादा सीटें आई थीं और बहुमत से पीछे रह गई

इंडिया टुडे के सर्वे के मुताबिक बीजेपी और कांग्रेस दोनों को बहुमत न मिलने और त्रिशंकु विधानसभा का दावा किया गया था.

इसी चुनाव में एनडीटीवी ने के पोल ऑफ पोल्स में 9 एग्जिट पोल को शामिल किया गया जिसमें दावा किया गया था कि बीजेपी को 97, कांग्रेस को 90 और जेडीएस को 31 सीटें मिल सकती हैं. इन्हीं 9 सर्वे में कुछ ने कांग्रेस को तो कुछ में बीजेपी को बहुमत का भी दावा किया गया था।

जब नतीजे आए तो 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें मिलीं थी. हालांकि ज्यादातर सर्वे में त्रिशंकु विधानसभा का ही अनुमान लगाया गया था।

सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी बीजेपी ने सरकार बनाने की कोशिश शुरू कर दी. इस दौरान जमकर नाटक भी हुआ. मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके बीएस येदियुरप्पा ने सदन में बहुमत साबित करने से 10 मिनट पहले इस्तीफा दे दिया. इसके बाद कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन दे दिया और कुमारस्वामी कर्नाटक के सीएम बन गए।

खास बात ये थी कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए ये एक तरह से मनोवैज्ञानिक झटका था क्योंकि एक तो सरकार नहीं बनी दूसरी ओर कुमारस्वामी का शपथग्रहण समारोह विपक्षी एकता का मंच बन गया।

अब बात करते हैं की कर्नाटक में बीजेपी हारी तो क्या बदल सकता है?
साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को अपनी सत्ता बचानी थी तो इस बार बीजेपी के सामने वही चुनौती है. कर्नाटक का इतिहास रहा है कि 1985 से कोई भी पार्टी सत्ता में लगातार दूसरी बार सरकार नहीं बना पाई है।

बीजेपी के सामने सिर्फ कर्नाटक ही जीतने की चुनौती नहीं है. राहुल गांधी की यात्रा के बाद कांग्रेस उनकी गंभीर नेता की छवि के तौर पर पेश कर रही है. दक्षिण भारत में इसके असर का दावा कांग्रेस कर रही है. दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में विपक्षी एकता का झंडा उठाए हैं और सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर बीजेपी कर्नाटक का चुनाव हारती है तो नीतीश की इस कवायद को मजबूती मिल सकती है. वहीं राहुल गांधी की यात्रा को सफलता से भी जोड़ा जाएगा.

दूसरी ओर बीजेपी के पास दक्षिण भारत की 129 लोकसभा सीटों में अभी सिर्फ 29 सीटें हैं जिसमें 25 सीटें तो सिर्फ कर्नाटक से हैं. बीजेपी इस बार कोशिश कर रही है कि हिंदी राज्यों में अगर सीटें कम पड़ती हैं तो इसकी भरपाई दक्षिण से हो जाए. अगर कर्नाटक का गढ़ बीजेपी के हाथ से निकलता है तो बीजेपी के दक्षिण मिशन पर भी झटका लगेगा. गौरतलब है कि बीजेपी तेलंगाना में TRS को हराने के लिए हर बार पुरजोर कोशिश करती रही है दूसरी ओर केरल में ईसाइयों को लुभाकर बड़ी ताकत बनने की कोशिश कर रही है.

अब जान लीजिए कितना अहम है कांग्रेस के लिए ये चुनाव ….
कर्नाटक विधानसभा का चुनाव कांग्रेस के लिए ‘करो या मरो’ वाला है. बीते कुछ सालों में हिमाचल छोड़ दें तो गुजरात, पंजाब, यूपी, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में झटका ही लगा है. कर्नाटक एक ऐसा राज्य हैं जहां पर कांग्रेस से बीजेपी की सीधी टक्कर है. कई सीटों पर जेडीएस भी मजबूत है.

क्षेत्रीय दलों के नेता जैसे ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल हमेशा इस बात पर अंदेशा जताते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस काफी नहीं है. अब अगर इस हालात में भी कांग्रेस सरकार नहीं बना पाती है तो इन नेताओं की बात सही साबित हो जाएगी. ऐसे में नतीजा ये होगा कि पीएम मोदी की अगुवाई में चुनाव दर चुनाव जीत रही बीजेपी का सामना करने के लिए कांग्रेस के पास शायद ही कोई क्षेत्रीय दल आए.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव की अहमियत कांग्रेस के रणनीतिकार भी समझ रहे हैं इसीलिए इस राज्य में प्रचार और रैलियां करने के लिए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी भी मैदान में उतरे थे. जबकि गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव में ऐसा नहीं देखा गया.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर सीएम पद के दावेदार सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार जैसे नेताओं ने कांग्रेस के मिजाज से उलट इस बार आक्रामक चुनाव प्रचार किया. साथ ही पार्टी ने मुसलमानों को लुभाने के लिए बिना किसी झिझक घोषणपत्र में कई लोकलुभावन ऐलान भी किए हैं. जिसमें आरक्षण की भी बात है. अगर कांग्रेस जीतती है तो इसे चुनावी हथियार के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

साल 2018 में कर्नाटक में सरकार न बना पाना बीजेपी के लिए एक तरह से ‘दुर्भाग्य’ साबित हुआ. पार्टी इसी साल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव भी हार गई. लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए बड़ा झटका था. राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे केंद्र की राजनीति में बीजेपी के ‘अंत का आरंभ’ भी मान लिया. लेकिन राजनीति की खूबी है कि 24 घंटों के अंदर यहां समीकरण बदल जाते हैं.

लोकसभा चुनाव में इन्हीं राज्यों में बीजेपी ने कांग्रेस का सफाया कर दिया और साथ ही मध्य प्रदेश और कर्नाटक में भी कांग्रेस के विधायक टूट गए और बीजेपी की सरकार बन गई.

अब जान लीजिए कौन-कौन है इस बार कर्नाटक में सीएम पद का दावेदार …
बीजेपी ने वर्तमान सीएम बसवराज बोम्मई के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा है. बोम्मई लिंगायत समुदाय से आते हैं जो कर्नाटक में हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं. तो वहीं कांग्रेस ने किसी भी गुटबाजी से बचने के लिए बिना सीएम पद के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा है. हालांकि पूर्व सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार खुद को सीएम पद का दावेदार मानते हैं और दोनों के बीच की अदावत भी किसी से छिपी नहीं है. कुछ लोग कांग्रेस के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी सीएम पद के दावेदार के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि इसकी संभावना कम ही है.

आप कर्नाटक में किस नेता को सीएम पद पर देखना चाहते हैं, हमें कमेंट कर के बताएं।

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