सोमवार, मई 13, 2024
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संकिसा में बौद्ध भिक्षुओं का हंगामा, स्तूप की पूजा पर अड़े, पुलिस ने खदेड़ा

फर्रुखाबाद, 12 अक्टूबर (वेबवार्ता)।

जिला मुख्यालय से 47 किलोमीटर दूर बौद्ध तपोस्थली संकिसा (बसंतपुर गांव) में शनिवार को बुद्ध महोत्सव के दौरान जमकर हंगामा हुआ। दुनिया भर से पहुंचे बौद्ध अनुयायी स्तूप की पूजा के लिए प्रतिबंधित स्थान पर जाने की जिदकर नारेबाजी पर उतर आए। पुलिस के बैरीकेड की परवाह न करते हुए अंदर घुसने की कोशिश की। कानून तोड़ने पर आमादा बौद्ध भिक्षुओं को पुलिस ने खदेड़कर प्रतिबंधित स्थान की सुरक्षा का घेरा बढ़ा दिया।

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बुद्ध महोत्सव के मुख्य अतिथि हैं। वह कुछ देरबाद यहां पहुंचने वाले हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रतिबंधित स्थान पर जाने के लिए आमादा बौद्ध भिक्षुओं की भीड़ को पुलिस ने भरसक रोकने की कोशिश की। बौद्ध अनुयायियों ने पुलिस पर गुस्सा दिखाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने टकराव टालने की कोशिश की। मगर भीड़ के बेकाबू होने पर पुलिस को बलपूर्वक खदेड़ना पड़ा। अब तक यहां दर्जनों देशों से बौद्ध भिक्षु, भंते और अनुयायी पहुंच चुके हैं।

न्यायालय ने 1986 में स्तूप पर पूजा-अर्चना पर रोक लगा दी थी। इस वजह से प्रतिबंधित स्थान के आसपास बैरीकेड लगाकर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस बल को उस वक्त कड़ी मशक्कत करनी पड़ी जब बौद्ध अनुयायी बैरीकेड लांघकर अंदर घुस गए। बाद में पुलिसबल ने सभी को खदेड़ दिया। पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार मिश्रा ने कहा है कि किसी को भी कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

बौद्ध भिक्षुओं ने पुलिस पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है। भिक्षुओं की मांग है कि यदि उहें स्तूप पर जाने से रोका जा रहा है तो सनातनधर्मियों को भी वहां नहीं जाने दिया जाए। उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर विषहरी देवी का मंदिर है। सनातनधर्मियों की मंदिर पर अटूट आस्था है। बौद्ध भिक्षु इस स्थान को भगवान बुद्ध की तपोस्थली मानते हैं।

इस स्थान पर शरद पूर्णिमा की पूर्ण संध्या पर हर साल सनातनधर्मी जुटते हैं। इस मौके पर पहुंचने वाले बौद्ध भिक्षु प्रतिबंधित स्थान के बाहर पूजा-अर्चना कर लौट जाते हैं। माना जाता है कि भगवान बुद्ध संकिसा में सोने की सीढ़ी से स्वर्ग से उतरे थे। रामायण में इस स्थान का उल्लेख संकश्या के रूप में है। यहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई में भगवान बुद्ध और सम्राट अशोक के काल के अवशेष मिल चुके हैं।

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