गुरूवार, अप्रैल 25, 2024
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विपक्ष को एकजुट करने में जुटे Nitish Kumar, आज Mamata Banerjee और Akhilesh Yadav से करेंगे मुलाकात!

2024 लोकसभा चुनाव के लिए विपक्ष ने सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दी है। पहले एनसीपी चीफ शरद पवार, तेलंगाना के सीएम और BRS प्रमुख केसीआर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एमके स्टालिन ने विपक्षी एकता के लिए कदम उठाए. अब बिहार के मुखिया भी बड़ा कदम उठा रहे हैं. आज वह एक ही दिन में ममता बनर्जी और अखिलेश यादव से मुलाकात करने जा रहे हैं. नीतीश कुमार यूपी की राजधानी लखनऊ में अखिलेश यादव तो वहीं पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात करने वाले हैं।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि नीतीश पहली बार विपक्षी एकता की कोशिश कर रहे जबकि उन्होंने करीब 10 दिन पहले ही एक बड़ा ऐलान किया था. नीतीश ने कहा था कि 2024 के चुनाव में वे पूरे देश का दौरा करेंगे. विपक्षी एकजुटता पर जोर देंगे. जिसे लेकर सभी से दिल्ली में बात हो चुकी है. कांग्रेस और बाकी दल भी सहमत हैं. नीतीश ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा था कि दिल्ली में जो बैठे हैं, उनको काम से नहीं, बल्कि प्रचार से मतलब है. इतिहास बदलने की कोशिश हो रही है।वहीं बिहार के सीएम अकेले नहीं हैं, जो विपक्ष को धार देने की कोशिश में लगे हैं. हालही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन उन दलों को एक मंच पर लाए, जिन्हें अब तक कांग्रेस साथ लाने में असफल रही. स्टालिन उन राजनीतिक पार्टियों को ना सिर्फ अपने मंच पर साथ लाए, बल्कि उन्होंने मंच से बीजेपी के खिलाफ लड़ाई छेड़ने का ऐलान भी किया.
स्टालिन के जन्मदिन पर एक मार्च को चेन्नई में एकजुट हुए विपक्षी दलों के नेताओं से उन्होंने कहा था कि 2024 का लोकसभा चुनाव इसलिए नहीं है कि इसमें कौन जीतता है, बल्कि इसलिए है कि इसमें किसको नहीं जीतना चाहिए. स्टालिन ने कहा था कि यह जन्मदिन का समारोह नहीं. बल्कि विपक्षी एकता की शुरुआत है. इसके ठीक एक महीने बाद एमके स्टालिन ने फिर विपक्षी दलों को सामाजिक न्याय सम्मेलन के नाम पर इकट्ठा किया और 2024 में अहंकार छोड़कर बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।हालांकि, स्टालिन की इस एकजुटता में भी कुछ दलों ने शिरकत नहीं की. सामाजिक सम्मेलन का न्योता मिलने पर भी नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और जगन मोहन रेड्डी की वाइएसआर कांग्रेस ने शिरकत नहीं की. बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस दोनों ही दलों ने अब तक खुद को विपक्षी एकता से बाहर रखा है. ज्यादातर विपक्षी दल तर्क देते हैं कि बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस खुद को सत्तारूढ़ एनडीए के करीब रखना पसंद करते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के विरोध से बचते हैं।

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