रविवार, मई 19, 2024
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जानिए कारगिल शहीद सोरन सिंह की कहानी

गोवर्धन तहसील क्षेत्र के छोटे से नगला उम्मेद की नगरिया के रहने वाले सोरन सिंह कारगिल युद्ध में दुश्मन से मुकाबला करते हुए शहीद हुए थे। सोरन सिंह अंतिम सांस तक लड़े और नापाक मंसूबों को लेकर आये दर्जनभर घुसपैठियों को मार गिराया। नगला उम्मेद की नगरिया के रहने वाले किसान अर्जुन सिंह के पुत्र सोरन सिंह का जाट रेजीमेंट में मई 1990 में चयन हुआ था। उनकी नागालैंड से लेकर पिथौरागढ़ तक पोस्टिंग रही। इसके बाद वे कारगिल की पहाड़ियों में भेजे गए। पाकिस्तान ने कश्मीर को कब्जाने के लिए ऊंचाई पर घुसपैठ कर ली थी। घुसपैठिये ऊंची पहाड़ियों पर थे। मुकाबला करते हुए गोली सोरन सिंह को लगी लेकिन हार नहीं मानी और गोली लगने के बाद भी दुर्गम पहाड़ियों में रेंगते हुए कई दुश्मनों को ढेर कर दिया था।

सीने और सिर में कई गोलियां लगने के कारण 26 जून 1999 को सोरन सिंह शहीद हो गये, लेकिन वे साथी सैनिकों के लिए आगे का रास्ता प्रशस्त कर गये। बहादुर जवानों ने लड़ाई जारी रखी और विजय प्राप्त हुई। विजय दिवस पर कारगिल शहीद सोरन सिंह की पत्नी कमलेश कुंतल ने बताया कि नगला उम्मेद की नगरिया से उनके पति सेना में देश की सेवा के लिए भर्ती हुए थे। कारगिल की लड़ाई में महज 28 वर्ष की उम्र में वह शहीद हो गए थे। उस समय शहीद के परिवार में बेटे विवेक की उम्र 5 वर्ष, बेटी डॉली 3 वर्ष और सबसे छोटे बेटे रोहित की उम्र छह माह थी। सरकार की ओर से शहीद को गोवर्धन में गैस एजेंसी आवंटित की गई। उस दौर से गुजरी शहीद की पत्नी कमलेश ने बताया कि धीरे-धीरे गिरिराज जी के आशीर्वाद से परिवार का पालन पोषण किया। उसके बड़े पुत्र विवेक और पुत्री डॉली की शादी हो चुकी है। रोहित आर्मी में देश सेवा कर रहा है।

शहीद की पत्नी कमलेश का कहना है कि पाकिस्तान को एक बार सबक सिखाने की आवश्यकता है। लेकिन वही इतना समय बीतने के बाद भी आर्मी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जैसे जवान पहले शहीद होते थे वही आज भी हो रहे है। पत्नी कमलेश ने कहा उनका बेटा आज भी देश की सेवा कर रहा है उन्हें अपने बेटे का भी डर सताता है।

रिपोर्ट- खन्ना सैनी

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